Measuring Methods
जब हम वर्कशॉप में कोई भी जॉब बनाते हैं – चाहे वह छोटी सी प्लेट हो, शाफ्ट हो या कोई फिटिंग पार्ट – तो सबसे पहला सवाल यही होता है: “यह पार्ट कितना लंबा है? कितना मोटा है? और सही साइज का है या नहीं?” इसी सवाल का जवाब हमें देता है measurement। measurement का मतलब है – किसी जॉब या पार्ट के आकार को मानक इकाइयों में जानना। यदि measurement गलत हुआ, तो चाहे आपकी filing कितनी भी अच्छी हो, पार्ट reject हो जाएगा।
Measurement क्या होता है? (Definition of Measurement)
अब ध्यान से समझिए। वर्कशॉप में काम करते समय हम किसी भी जॉब या पार्ट को आंख से देखकर अंदाज़े से नहीं बनाते, बल्कि उसे माप (Measurement) के आधार पर बनाते हैं। Measurement का अर्थ है – किसी जॉब, पार्ट या कम्पोनेंट के आकार जैसे लंबाई, चौड़ाई, मोटाई, ऊँचाई, व्यास या कोण को किसी मानक इकाई (Standard Unit) में निर्धारित करना। सरल शब्दों में कहें तो, जब हम यह बताते हैं कि कोई पार्ट 50 mm लंबा है या 20 mm मोटा है, तो यही प्रक्रिया Measurement कहलाती है।
ध्यान रखिए — Industry में बनने वाले हर product की quality पूरी तरह measurement पर निर्भर करती है। अगर measurement सही नहीं हुआ, तो चाहे machining कितनी भी अच्छी हो, पार्ट reject हो सकता है।अब एक practical example समझिए। मान लीजिए आपको एक shaft बनानी है जो किसी hole में fit होनी है।अगर shaft का diameter hole से थोड़ा सा भी ज्यादा हुआ, तो shaft अंदर जाएगी ही नहीं। और अगर कम हुआ, तो ढीली हो जाएगी।इसलिए fitter के लिए measurement केवल theory नहीं, बल्कि daily working skill है।
Measurement समझने के बाद अगला जरूरी step है Measuring Tools को जानना। इसके लिए यह article helpful रहेगा — Measuring Tools – ITI Fitter Notes .
Measurement Fitter के लिए इतना जरूरी क्यों है?
अब मान लीजिए, आपको एक shaft बनानी है जो किसी hole में fit होनी है। अगर shaft ज़रा सी भी ज्यादा मोटी बन गई, तो वह hole में जाएगी ही नहीं। और अगर पतली बन गई, तो ढीली रहेगी।यही कारण है कि fitter को सबसे पहले measurement सीखाया जाता है। Industry में काम अंदाजे से नहीं, बल्कि measurement के आधार पर होता है।
सही measurement से:
- काम पहली बार में सही होता है
- Material waste नहीं होता
- Supervisor का भरोसा बनता है
- Job inspection में पास होती है
मापने की विधियाँ — Measuring Methods in Fitter Trade
अब सबसे पहले यह समझ लीजिए कि Measuring Methods क्या होती हैं। जब हम workshop में कोई भी job बनाते हैं — चाहे वह filing का काम हो, drilling हो या fitting — तो हर step पर हमें यह जानना पड़ता है कि job सही size में है या नहीं।
NCVT और NIMI syllabus के अनुसार Measuring Methods theory और practical दोनों परीक्षाओं में बहुत महत्वपूर्ण विषय है। इसी कारण हर fitter को यह पता होना चाहिए कि कौन-सी विधि कब और किस tool के साथ प्रयोग करनी है।
अगर आप पहले Measurement क्या है यह detail में समझना चाहते हैं, तो उस लेख को भी ज़रूर पढ़ें।
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मैज़रिंग टूल्स
अब सवाल आता है — measurement लेते कैसे हैं? इसके लिए जिन उपकरणों का प्रयोग किया जाता है, उन्हें Measuring Tools कहा जाता है।
हर tool का अपना काम होता है। Rough measurement के लिए अलग tool, और high accuracy के लिए अलग tool प्रयोग किया जाता है।
Measuring tools को detail में समझना बहुत जरूरी है, खासतौर पर exam और practical दोनों के लिए। इस विषय पर हमारा यह लेख भी पढ़ें — Measuring Tools – ITI Fitter Notes.
System International (SI System) के अनुसार लंबाई की मूल इकाई मीटर होती है।
- 1 मीटर = 1000 मिलीमीटर
- 1 सेंटीमीटर = 10 मिलीमीटर
- 1 मिलीमीटर = 1000 माइक्रोन
- 1 माइक्रोमीटर = 0.001 मिलीमीटर
अगर आप workshop tools के बारे में detail में पढ़ना चाहते हैं, तो वह article भी उपयोगी रहेगा।
मापने की मानक इकाईयां Standard Units of Linear Measurement)
Workshop में measurement हमेशा किसी standard unit के आधार पर किया जाता है ताकि सभी measurements एक जैसे रहें।
मुख्य रूप से दो प्रणालियाँ प्रचलित हैं: British System और Metric System।
Linear Measurement को detail में समझने के लिए Linear Measurement article देखें।
ब्रिटिश प्रणाली (british system) या F.P.S
आइये हम जानते है की ब्रिटिश प्रणाली (british system) या F.P.S क्या है इसे फुट, पाऊण्ड और सेकेंड प्रणाली भी कहते हैं अर्थात् लम्बाई को फुट में , तथा भार को पाऊण्ड में और समय को सेकेंड में माप जाता है, इसको ब्रिटेन में सन1855 से प्रचलन में लाया गया था।ब्रिटिश प्रणाली (british system) या F.P.S प्रणाली के अनुसार लम्बाई, ताप और कोण के माप इस प्रकार हैं.
इसके अंतर्गत लम्बाई की माप-
- 1मील = 760 गज = 5280 फुट
- 1गज = 3 फुट = 36 इंच...
- 1फुट = 12 इंच
- 1 इंच च्- 64 भाग न ॥/64" या 1 चूल
- 1 इंच = 32 भाग =1/32"
इसके अंतर्गत ताप के माप
- ताप सेंटीग्रेड और फार्नहाईट रयुमर और कैल्विन मापे जाते हैं-
- सेंटीग्रेड = 0 डिग्री सेंटीग्रेड से100 डिग्री सेंटीग्रेड
- फार्ननाईड = 32 डिग्री फार्नहाईट से 212 डिग्री फार्नहाईट
- 100 डिग्री सेंटीग्रेड =180 डिग्री फार्नहाईट
इसके अंतर्गत कोण के माप
ब्रिटिश प्रणाली में कोण के माप इस प्रकार हैं-
- 1वृत्त = 360 डिग्री,
- 1वृत्त = चार समकोण ही
- 1 समकोंण = 90०
- 1डिग्री = 60 मिनट
- 1मिनट = 60 सेकिंड
- 1 रेडियन = 57.3 डिग्री सेंटीग्रेड
मीट्रिक प्रणाली (metric system )M.K.S.
आजकल विश्व के अधिकतर देशों में इसी प्रणाली का प्रचलन है। भारत में (B.I.S) तथा (INTERNATIONAL STANDARD ORGANISATION) (I.S.O)ने इसे स्वीकृति दी है । इसमें लम्बाई मीटरों में , तोल ग्रामों में और समय सेकिंड में व ताप सैल्शियस में मापते हैं । इसे सी.जी.एस. ( C.G.S. ) Centimetre , Gram , Second भी कहते हैं ।
मीट्रिक प्रणाली (metric system )M.K.S. के अंतर्गत लम्बाई की माप
- 1 मिलीमीटर - 1000u
- 1 माइक्रोन -0.001 मि.मी. या । माइक्रोमीटर ( um )
- 1 मीटर = 100 सेंटीमीटर = 1000 मिलीमीटर
- 1000 मीटर =1 किलोमीटर
मीट्रिक प्रणाली (metric system )M.K.S. के अंतर्गत कोण की माप
- 1 वृत्त -400 ग्रेड
- 1 वृत्त - चार समकोण
- 1समकोण -100 ग्रेड
- 1 ग्रेड -100 मिनट
- 1 मिनट = 100 सेकिंड = सेकिंड सेकिंड
मीट्रिक प्रणाली (metric system )M.K.S. के अंतर्गत समय का माप
- 60 सैकिंड = 1 मिनट
- 60 मिनट = | घण्टा
- 24 घण्टे = 1 दिन – रात
ब्रिटिश तथा मीट्रिक प्रणाली में सम्बन्ध( relationship between the British and the metric system)
यदि हमे किसी मशीन पार्ट का माप ब्रिटिश प्रणाली( British system) में दिया हो तो हम उसे मीट्रिक प्रणाली (metric system )में बदल कर समझ सकते है व उसे बना सकते है
जैसे -
1 इंच = 25.4 मिलीमीटर या 2.54 मीटर या 0.0254 मीटर
1 फुट 30.48 सेंटीमीटर -0.3048 मीटर
1 गज = 0.914 मीटर = 914 सेंटीमीटर
1 मील =1.6093 किलोमीटर - 1609.3 मीटर
1 मिलीमीटर =0.0393
1 सेंटीमीटर =0.3937 इंच
1 मीटर = 39.37 इंच -1.094 गज
मानक मीटर ( Standard Metre )
अब ध्यान से समझिए। Measurement तभी सही मानी जाती है जब पूरी दुनिया में उसका एक ही standard हो। इसी standard को बनाए रखने के लिए Standard Metre बनाया गया।
फ्रांस की राजधानी पेरिस (Paris) में Weights और Measures के अन्तर्राष्ट्रीय कार्यालय (International Office of Weights and Measures) में 0°C तापमान पर Platinum–Iridium धातु की एक विशेष छड़ (rod) सुरक्षित रखी गई है।इस छड़ पर बने हुए दो निश्चित चिन्हों के बीच की दूरी को ही एक मानक मीटर (Standard Metre) माना गया है।इसी standard के आधार पर दुनिया के अलग-अलग देशों में मानक मीटर के प्रारूप (format rods) रखे गए हैं, ताकि सभी देशों में measurement एक-जैसा रहे।
भारत में मानक मीटर की एक प्रारूप छड़ National Physical Laboratory (NPL), Delhi में रखी गई है। इस छड़ पर बने दो चिन्हों के बीच की दूरी को भारत में Standard Metre माना जाता है।
माप लेने की विधियाँ (Measuring Methods)
Workshop में job बनाते समय सिर्फ measurement जानना ही काफी नहीं होता, बल्कि यह भी जानना जरूरी होता है कि measurement किस तरीके से ली जाए।इसी उद्देश्य से माप लेने की अलग-अलग विधियाँ (Measuring Methods) प्रयोग में लाई जाती हैं।
01. प्रत्यक्ष माप द्वारा (By Direct Measurement)
इस विधि में job की माप सीधे प्रत्यक्ष मापने वाले उपकरणों से ली जाती है।
जैसे — Steel Rule, Vernier Caliper, Micrometer आदि। इन tools को Direct Measuring Instruments कहा जाता है।इस विधि में measurement लेने के लिए किसी सहायक औजार की आवश्यकता नहीं होती।जब job की accuracy सीधे tool से पढ़ी जाती है, तो उसे Direct Measurement कहा जाता है।
Steel Rule, Vernier Caliper और Micrometer को detail में समझने के लिए यह article ज़रूर देखें — Direct Measuring Instruments – ITI Fitter
सभी Direct Measuring instrunents को समझने के लिए Fitter Measuring Tools Notes देखें।
02. अप्रत्यक्ष माप द्वारा ( By Indirect Measurement )
अब ध्यान से समझिए। हर जगह measurement को सीधे scale या micrometer से लेना possible नहीं होता।ऐसी स्थिति में अप्रत्यक्ष माप (Indirect Measurement) का प्रयोग किया जाता है।इस विधि में job की माप पहले किसी अप्रत्यक्ष मापी औजार (Indirect Measuring Tool) से ली जाती है और उसके बाद reading लेने के लिए किसी प्रत्यक्ष मापी उपकरण (Direct Measuring Instrument) का उपयोग किया जाता है।
उदाहरण के लिए — Outside Caliper या Inside Caliper से job का size पकड़ा जाता है और फिर उस opening को Steel Rule या Micrometer से मापकर actual reading ली जाती है।इस प्रकार की माप को Indirect Measurement कहा जाता है।
Outside Caliper, Inside Caliper और अन्य Indirect Measuring Instruments को detail में समझने के लिए यह article ज़रूर देखें — Indirect Measuring Instruments – ITI Fitter
सभी Indirect Measuring instrunents को समझने के लिए Fitter Measuring Tools Notes देखें।
किसी भी पार्ट या जॉब की माप लेने के तरीके
अब हम यह समझते हैं कि workshop में किसी भी part या job की measurement किन-किन प्रकार से ली जाती है।NCVT और NIMI syllabus के अनुसार मुख्य रूप से चार प्रकार की measurements प्रचलित हैं।
Linear Measurement को examples के साथ detail में पढ़ने के लिए यह article देखें — Linear Measurement – ITI Fitter
02. कोण वाले माप (Angular Measurement)
जब किसी part की दो सतहें आपस में मिलती हैं, तो उनके बीच एक कोण (Angle) बनता है।इस कोण को मापने की प्रक्रिया को Angular Measurement कहा जाता है।
Angular measurement के लिए Combination Bevel, Universal Bevel, Simple Protractor और Vernier Bevel Protractor का प्रयोग किया जाता है।
03. रेडियल वाले माप (Radial Measurement)
जब किसी part की उत्तल (Convex) या अवतल (Concave) सतहों का माप लिया जाता है, तो उसे Radial Measurement कहते हैं।इस प्रकार की measurement Radius Gauge, Plug Gauge और Ring Gauge की सहायता से की जाती है।
04. समतल सतह के माप (Flat Surface Measurement)
जब किसी part या job की समतल (Flat) सतह की जाँच की जाती है, तो उसे Flat Surface Measurement कहा जाता है।इस measurement के लिए Surface Plate, Straight Edge, Try Square और Dial Test Indicator का प्रयोग किया जाता है।
- Length, width, thickness → Linear Measurement
- Angle between surfaces → Angular Measurement
- Curved surface → Radial Measurement
- Flatness checking → Flat Surface Measurement
अगर आप बिल्कुल शुरुआत से यह समझना चाहते हैं कि Measurement क्या होता है और workshop में इसका क्या role है, तो पहले यह लेख ज़रूर पढ़ें — Measurement क्या है (ITI Fitter).
अगर आप इस topic से related MCQ practice करना चाहते हैं, तो नीचे दिया गया article ज़रूर देखें — Measuring Methods MCQ – ITI Fitter.



